22 साल तक चला मुकदमा, फिर भी जेल नहीं गए आरोपी; SC ने इलाहाबाद हाईकोर्ट पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, अक्टूबर 21 -- 22 साल तक मुकदमा चलने के आधार पर आरोपियों को जेल भेजने के बजाय राहत देना सुप्रीम कोर्ट को नागवार गुजरा है। गंभीर चोट पहुंचाने के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपियों के प्रति दिखाई गई सहानुभूति गलत थी। अदालतों ने यह ध्यान नहीं दिया कि पीड़ित आज भी इलाज करा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के इस मामले में दोनों आरोपियों को सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामले की नए सिरे से सुनवाई करने को कहा है।ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी पांच साल की सजा मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर रिहा कर दिया। इस फैसले के कारण दोनों आरोपियों को एक दिन भी जेल में ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.