भागलपुर, मई 5 -- नवगछिया, निज संवाददाता। सेतु टूटने के बाद  गंगा नदी के किनारे बालू पर महिलाएं पसीने से परेशान बच्चों का हाथ थामे चलने को विवश हैं। बच्चे भी रोए जा रहे हैं। गीता देवी परेशान होकर अपनी रो रही नन्हीं बेटी से कहती है तो मत बाबू  देरी से सही शाम में घर चलो जइबे। गंगा घाट पर घंटों धूप में खड़े लोगों ने झुंझलाकर कहा कि 2001 से भी कठिन सफर हो गया है। बिंदेश्वरी मंडल ने कहा कि उस समय बड़ी-बड़ी जहाज चलती थी। हमलोग एक साथ गाड़ी से उतरकर जहाज पर बैठकर गंगा पार हो जाते थे। अभी बालू में पैदल चलना पड़ रहा है। उसके बाद छोटी-छोटी नाव पर जान हथेली पर लेकर गंगा पार कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- पूर्णिया से भागलपुर के लिए जाने वाली सरकारी बस नवगछिया तकनाव दुर्घटना के बाद प्रशासन नहीं सजग गंगा घाट महादेवपुर में पूर्व में हुए नाव दुर्घटना और हाल मे...