हरींद्र तिवारी, जुलाई 27 -- झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि रात दो बजे काजल और लिपस्टिक लगाना किसी महिला के मानसिक रूप से बीमार होने का प्रमाण नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी के बाद नई-नवेली दुल्हन का किसी भी समय सजना-संवरना एक सामान्य व्यवहार है और इसे मानसिक बीमारी से जोड़ना उचित नहीं है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने गिरिडीह फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी। पति ने अदालत में दावा किया था कि वर्ष 2015 में हुई शादी के बाद उसे पता चला कि उसकी पत्नी मानसिक रूप से बीमार है। उसने कहा कि एक रात करीब दो बजे उसने पत्नी को अलमारी के सामने खड़े होकर काजल और लिपस्टिक लगाते देखा, जिससे उसे पत्नी की मानसिक स्थिति पर संदेह हुआ। उसका आरोप था ...