नई दिल्ली, अक्टूबर 8 -- कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि 1970 के दशक में कितने लोगों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पार की थी और क्या उन सभी को वापस भेजना (निर्वासित करना) व्यावहारिक रूप से संभव है। हाईकोर्ट एक ऐसे व्यक्ति की हिरासत और निर्वासन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिस पर बांग्लादेशी नागरिक होने का आरोप है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार से पूछा कि 1970 के दशक में कितने लोगों ने सीमा पार की थी और क्या 'उन सभी को वापस भेजना' व्यावहारिक रूप से संभव है। जज ने यह भी कहा कि जमीनी हकीकत को समझने के लिए बांग्लादेश से सटे ज़िलों का दौरा करना चाहिए। कोर्ट शाहिदुल शेख द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 'विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय' (एफआरआरओ) द्वारा ...