वरिष्ठ संवाददाता, अगस्त 18 -- जिस वैद्य की मौत को 18 साल बीत चुके हैं, उसका नाम अब भी दवा बनाने के लाइसेंस में जिंदा है। इतना ही नहीं, 2009 में पत्नी ने कंपनी (बालजीवन मेडिसिन्स प्राइवेट लिमिटेड) को पति की मृत्यु की लिखित सूचना भी दे दी थी। इसके बावजूद लाइसेंस रिकॉर्ड में वैद्य वेदराम सिंह का नाम दर्ज मिला। इस मामले की शिकायत के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। जांच के लिए पहुंचे अधिकारी ने मुख्यालय के रिकॉर्ड में भी यही नाम पाया। अब सवाल है कि 18 साल तक मृत वैद्य का नाम लाइसेंस में कैसे चलता रहा, हर बार सत्यापन की प्रक्रिया आखिर कितनी गंभीर थी? अलीगढ़ के एलमपुर के रहने वाले अमर सिंह ने आइजीआरएस (IGRS) पर शिकायत कर बालजीवन मेडिसिन्स प्राइवेट लिमिटेड, सारसौल के ड्रग लाइसेंस में मृत वैद्य का नाम दर्ज होने पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार कंपनी क...