लखनऊ, दिसम्बर 29 -- लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। जन्मजात विकृतियों का जल्द से जल्द इलाज जरूरी है। इसमें देरी से समस्या गंभीर हो सकती है। इलाज कठिन हो जाता है। कई बार मरीज की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। यह जानकारी केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत ने दी। वह सोमवार को पीडियाट्रिक सर्जरी डे पर ओपीडी में कार्यक्रम हुआ। इसमें मरीज व उनके तीमारदार शामिल हुए। डॉ. जेडी रावत ने बताया कि 18 वर्ष तक बच्चों में जन्मजात विकृतियों का इलाज हो जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जन्मजात बहुत सारी विकृतियां बच्चों में होती हैं। इसमें मलद्वार का विकसित न होना प्रमुख है। खाने व सांस की नली आपस जुड़ी होना भी गंभीर समस्या है। हर्निया, पेशाब से सम्बन्धित बीमारी, पेट के ट्यूमर, पथरी आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीडियाट्रिक सर्जन की क...