नई दिल्ली, अगस्त 15 -- सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव की आराधना तक सीमित नहीं है। इस पवित्र माह में उनके पुत्र भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है। सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा गणेश चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणपति को दूर्वा अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से बप्पा की शरण में आने वाले के जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं।दूर्वा गणेश चतुर्थी कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 16 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि की मान्यता के कारण दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजन 16 अगस्त 2026 को ही किया जाएगा। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से गणेश जी की आराधना करते हैं।पूजा का शुभ मुहूर्त...