15 साल की उम्र में अकेली दिल्ली आईं, रेलवे स्टेशन पर सोईं, ऐसे बदली पूजा की जिंदगी
नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- आप रोजाना अपने आसपास से लाल चटख जोमैटो यूनिफॉर्म पहने ढेरों डिलीवरी पार्टनर्स गुजरते देखते होंगे। लेकिन ये उस डिलीवरी पार्टनर की कहानी है जिसके हेलमेट उतारते ही लोगों की निगाहें थम सी जाती हैं और उनके मुंह से गर्व के साथ एक ही शब्द निकलता है... वाह। एक वक्त था जब दिल्ली के एक रेलवे स्टेशन का फर्श पूजा के लिए रात गुजारने की जगह हुआ करता था। आज वही पूजा लाल जोमैटो यूनिफॉर्म में दिल्ली की सड़कों पर डिलीवरी करती हैं, अपना किराया खुद चुकाती हैं और झारखंड में अपनी मां की आर्थिक मदद भी करती हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ खास बातचीत में पूजा बताती हैं कि डिलीवरी करते समय लोगों की प्रतिक्रियाएं अक्सर उन्हें इमोश्नल फील कराती हैं। कई लोग उन्हें देखकर कहते हैं कि एक महिला को इस तरह काम करते देख उन्हें गर्व महसूस होता है। हाल...
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