कुशीनगर, सितम्बर 30 -- कुशीनगर। निज संवाददाता बड़ी गंडक यानी नारायणी नदी की धारा ने पिछले 14 वर्षों में कई बार अपना रुख बदला। कटान के स्थान बदलते रहे, खेत और बस्तियां नदी में समाती रहीं, लेकिन तटवर्ती क्षेत्र के सामने खड़ा बाढ़ और कटान का खतरा खत्म नहीं हुआ। वर्ष 2012 में जहां नदी के कटान से अहिरौलीदान के कई टोले अपना अस्तित्व खो बैठे थे तो वहीं इस बार उसी नारायणी ने एपी तटबंध को तोड़कर गांवों की आबादी की ओर रुख कर लिया। इन 14 वर्षों के दौरान बाढ़ सुरक्षा के नाम पर कई परियोजनाएं आईं, स्पर और तटबंधों पर काम हुए, लेकिन नदी के बदलते तेवर के सामने सुरक्षा व्यवस्था बार-बार सवालों के घेरे में आती रही। यह भी पढ़ें- कुशीनगर में नारायणी नदी का कहर, बांध टूटने से बाढ़ की चपेट में आए कई गांव, CM ने खुद लिया जायजाबाढ़ सुरक्षा की विफलताएँ साल 2012 से ...