गाजीपुर, अगस्त 13 -- भांवरकोल। गाजीपुर की धरती ने स्वतंत्रता संग्राम में कई वीर सपूतों को जन्म दिया। इनमें शेरपुर कलां निवासी बाल क्रांतिकारी यमुना गिरि का नाम विशेष रूप से याद किया जाता है। महज 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ऐसा साहस दिखाया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। यह भी पढ़ें- स्वतंत्रता आंदोलन में दादा भूदान का रहा योगदानयुद्ध का नेतृत्व महात्मा गांधी के आह्वान पर 9 अगस्त 1942 को शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज गाजीपुर पहुंची तो यमुना गिरि ने 11 अगस्त को जिला मुख्यालय के सिटी हाई स्कूल, डीएवी स्कूल और विक्टोरिया गवर्नमेंट स्कूल के छात्रों को एकजुट कर आंदोलन का नेतृत्व किया। अगले दिन विद्यालयों में हड़ताल करा दी गई। रणनीति के तहत 14 अगस्त 1942 को यमुना गिरि अपने साथी चांदपुर निवासी राम विशुन राय उर्फ विसु...