भागलपुर, जून 12 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। एक धर्मशाला में आयोजित सातदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता की अमृतवर्षा का रसास्वादन किया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास पंडित बाल प्रभु ने भक्ति, त्याग और समर्पण का संदेश दिया। समुद्र मंथन का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों से भी अधिक श्रेष्ठ और अमूल्य रत्न हरि भक्ति है। श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से जीवन पवित्र एवं सार्थक बन जाता है। भगवान वामन अवतार प्रसंग में बताया कि धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए भगवान समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतरित होते हैं। वामन अवतार त्याग, विनम्रता और समर्पण की सर्वोच्च शिक्षा देता है। यह भी पढ़ें- श्रीमद् भागवत कथा में सुनाया भगवान के वामन अवतार का प्रसंग दान का महत्व उसकी मात्रा में नहीं, ...