शिमला, अप्रैल 4 -- 4 अप्रैल 1905 का दिन हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक ऐसी दर्दनाक तारीख के रूप में दर्ज है, जिसे आज भी याद करते ही लोगों के मन में दहशत की तस्वीरें उभर आती हैं। आज ही के दिन कांगड़ा क्षेत्र में 7.8 से 7.9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसने पूरे पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को हिला कर रख दिया था। इस भूकंप में 20 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी और करीब एक लाख से ज्यादा भवन पूरी तरह जमींदोज हो गए थे। कांगड़ा, धर्मशाला और मैक्लोडगंज जैसे शहरों की अधिकांश इमारतें मलबे में बदल गई थीं। यह भूकंप पश्चिमी हिमालय क्षेत्र का अब तक का सबसे घातक भूकंप माना जाता है। उस समय 53 हजार से अधिक मवेशियों की भी मौत हुई थी और जलसेतु तथा जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ठप हो गई थीं। उस दौर में इस आपदा से उबरने की लागत करीब 29 लाख र...