हाथरस, अप्रैल 30 -- हाथरस, हिन्दुस्तान संवाद। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति देवगुरु को नवग्रहों में सबसे शुभ माना गया है। धर्म, ज्ञान, विवाह, संतान भाग्य और समृध्दि के कारक बृहस्पति ग्रह अपनी दृष्टी कुंडली के जिस भाव में भी देख लेते हैं। उसके प्रभाव बढ़ा देते हैं। 12 वर्ष के बाद एक ऐसा संयोग बन रहा है। जिसमें देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतशाचार्यो के अनुसार यह संयोग देश में आर्थिक स्थिरता और शांति लाने के साथ कई राशियों पर संकारत्मक प्रभाव डालेगा। आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि गुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर दो जून को सुबह छह बजकर तीस मिनट पर होगा। बृहस्पति कर्क राशि में 31 अक्तूबर की शाम सात बजकर19 मिनट तक रहेंगे। उसके बाद सूर्य आधिपत्य वाली सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। गुरु के कर...