नई दिल्ली, मई 29 -- आपातकालीन स्थिति यानी इमरजेंसी में मदद मांगने के लिए अब लोगों को अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तीन महीने के भीतर सभी तरह की इमरजेंसी और एंबुलेंस हेल्पलाइन नंबरों को एक ही नंबर '112' (हेल्पलाइन 112) के साथ जोड़ दिया जाए।ट्रॉमा केयर नागरिकों के 'जीवन का अधिकार' सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने इस अहम मामले पर निर्देश जारी किए। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को सही समय पर ट्रॉमा केयर (आपातकालीन इलाज) मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का अभिन्न अंग है। कोर्ट ने कहा कि इस दिशा में एक व्यवस्था में बदलाव लाने, ट्रॉमा केयर का एक समान ढांचा तैयार करने, जनत...