बिजनौर, सितम्बर 1 -- गीत ग़ज़ल संगम एकेडमी नजीबाबाद की एक शेरी महफिल आयोजित की गई। जिसमें शायरों ने अपना उम्दा कलाम पेश कर खूब दाद बटोरी। वक्ताओं ने दिलों को जोड़ने वाली शायरी करने पर जोर दिया। शफीक नगर स्थित मौलाना अकरम कासमी के निवास पर शेरी महफिल का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कारी अहसान और कारी फैजुल हसन ने कहा कि उर्दू महफिलों के आयोजनों से उर्दू अदब को बढ़वा मिलने की बात कही। शेरी महफिल का आगाज कारी शोएब नफीस की नाते पाक से हुआ। डॉ आफताब नोमानी ने कलाम पेश किया... तुम्हें मजलूमों की आहों का अंदाजा नहीं शायद। ये वोह ताकत है जो ताजे हुकूमत छीन लेती है। डॉ नसीम अख्तर ने कहा...मां चली गई जब से नींद नहीं आती। लोरियां सुनाने को कोई भी नहीं आता। सुहैल शाहब शम्सी ने कहा...छोटा सा आशियाना भी हिस्सों में बट गया, दीवारें इतनी हो गईं घर ही नहीं...
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