नई दिल्ली, दिसम्बर 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में सुनवाई के दौरान अपने ही शब्दों में कही गई 'सिक्स सेंस' के आधार पर एक असाधारण रास्ता अपनाते हुए 10 साल की सजा काट रहे दोषी व्यक्ति की सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने माना कि मामला सहमति से बने रिश्ते का था, जिसे गलतफहमी के चलते आपराधिक रंग दे दिया गया। अदालत के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता और आरोपी का विवाह हुआ और अब दोनों साथ सुखपूर्वक जीवन बिता रहे हैं। यह फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिया। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न सिर्फ सजा बल्कि एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया।कैसे बदला केस का रुख मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुं...
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