'संरक्षित पूजा स्थलों की कानूनी सुरक्षा नजरअंदाज नही कर सकते'
नई दिल्ली, सितम्बर 8 -- संभल जामा मस्जिद प्रबंधन समिति ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कानून के तहत किसी प्राचीन स्मारक के मूल धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना जरूरी है। समिति ने कहा कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए स्मारक में प्रवेश की मांग करने वाले दावे के आधार पर, संरक्षित पूजा स्थलों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष संभल की जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने पक्ष रखते हुए यह दलील दी। उन्होंने पीठ से कहा कि हिंदू पक्षकार प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 18 (जो संरक्षित स्मारकों तक पहुंचने के अधिकार से संबंधित है) पर तो जोर दे रहे हैं, लेकिन धारा 16 में दी गई अधि...
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