नई दिल्ली, मई 26 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों से कहा कि वे उसे वन रक्षकों और फ्रंटलाइन कर्मियों को मुआवजा देने के मौजूदा नीतिगत ढांचे की जानकारी दें। ये वे कर्मी हैं जिनकी आधिकारिक ड्यूटी निभाते समय मृत्यु हो जाती है या उन्हें जानलेवा चोटें लगती हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आवेदन में उन खतरनाक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला गया है जिनके तहत वन रक्षकों और अन्य फील्ड कर्मियों को अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है। इनमें अवैध खनन कार्यों, शिकार की गतिविधियों और वन अपराधों में शामिल संगठित समूहों द्वारा किए जाने वाले हमलों से उत्पन्न होने वाले जोखिम भी शामिल हैं। यह आवेदन 'राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा' श...