नई दिल्ली, मई 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि उपभोक्ताओं से उस सेवा के लिए पैसे नहीं मांगे जा सकते जो उन्हें अब नहीं मिल रही है। अदालत आगे कहा कि शुल्क निर्धारण करना सिर्फ एक गणितीय अभ्यास नहीं है, बल्कि एक नियामक संतुलन बनाने का कार्य है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) की अपील पर अपना फैसला सुनाया। इस अपील में एपीटीईएल के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष फरवरी में विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें निर्देश दिया गया था कि दिल्ली स्थित रिठाला संयुक्त चक्र विद्युत संयंत्र की संपूर्ण पूंजी लागत को 15 वर्षों की अवधि में मूल्यह्रास के माध्यम से वसूल करने की अनुमति दी जाए।पीठ यह भी पढ़ें- यूपी में 75 लाख प्रीपेड मीटरों...