पणजी, नवम्बर 7 -- बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि अगर कोई पहले से पंजीकृत मतदाता अपना आवास बदलता है तो उसे फॉर्म-6 या पहले से भरा हुआ एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसा करना मतदाता को गलत घोषणा करने के लिए बाध्य करने जैसा है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की झूठी घोषणा करने पर संबंधित व्यक्ति को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ सकता है। यह फैसला सालगांवकर परिवार के सदस्यों की याचिका पर आया है। परिवार के छह सदस्यों के नाम संताक्रूज विधानसभा क्षेत्र में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर रहने जाने के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को इन सभी छह सदस्यों के नाम तत्काल अंतिम ...