नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने शनिवार को कहा कि भारत में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के लिए केवल जज को ही जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी अक्सर वकीलों की बहस और कानूनी प्रक्रिया के तरीके से प्रभावित होती है। 'वैश्वीकरण के युग में मध्यस्थता' विषय पर आईसीए के पांचवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि जज पहले से ही प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई करते हैं। उन्होंने कहा कि जज और मामले के निपटारे की दर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। यह वकीलों पर निर्भर करता है कि वे कितनी देर तक बहस करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में देरी के लिए वकीलों और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबी-लंबी बहसें करना ...