नई दिल्ली, सितम्बर 19 -- 'ये कोई आत्महत्या नहीं मर्डर है मर्डर...अगर उसे आत्महत्या ही करनी होती तो वो जेल में ही कर लिया होता। इतने सालों तक इंतजार क्यों करता? मुझे तो इस बात पर पूरा यकीन है कि उसे, उन्हीं लोगों ने मारा है, जिनके राज उसके पास थे....', इतना कहने के बाद 66 साल के झब्बू लाल थोड़ी देर के लिए चुप्प हो जाते हैं और सामने पड़े कपड़ों को प्रेस करने लगते हैं। थोड़ी देर के बाद कैमरे की तरफ देखकर एक लड़खड़ाती सी आवाज में वो फिर बेलते हैं, '20 साल हो गए, मेरी बेटी गई, केस के चक्कर में जमीन-जायदाद भी चले गए पर हमें न्याय नहीं मिला...हमारे साथ सिर्फ मजाक किया गया।'कोठी नंबर D-5 की कभी ना भूलने वाली कहानी 29 दिसंबर 2006 को पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। इस कड़ाके की ठंड में जब लोग अपने घरों में रजाइयों में दुबके हुए थे, तो...