उज्जैन, अप्रैल 25 -- उज्जैन में हाल ही में हर्षा छिछारिया द्वारा संन्यास ग्रहण किए जाने के बाद यह विषय धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। इस मुद्दे पर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. शैलेशानंद गिरि, स्वस्तिक पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. अवधेश पुरी और साध्वी डॉ. विद्या पुरी ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। यह भी पढ़ें- एक सब्जेक्ट में आई सप्लीमेंट्री, 12वीं की छात्रा ब्रिज से कूदी; तनाव में थी"संन्यास एक आंतरिक अनुभूति" महामंडलेश्वर डॉ. शैलेशानंद गिरि ने कहा कि संन्यास कोई पूर्व नियोजित प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह एक दिव्य और आंतरिक अनुभूति है, जो किसी भी व्यक्ति के भीतर अचानक उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमीर-गरीब, राजा-रंक-किसी के साथ भी यह अनुभूति घट सकती है। उन्होंने बताया कि हर्षा के संन्यास को लेकर उनकी बा...