मुजफ्फरपुर, जनवरी 15 -- गायघाट,एक संवाददाता। जारंग बुढ़िया माई स्थान पर भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पं. मनीष पाराशर महाराज ने श्री शुकदेव जी महाराज और महाराज परीक्षित के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्री शुकदेव जी महाराज का जन्म मानव कल्याण के लिए हुआ था, ताकि समाज को धर्म, भक्ति और सदाचार का मार्ग दिखाया जा सके। उन्होंने बताया कि बिना सत्संग के भगवान की प्राप्ति संभव नहीं है। भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 'प्रथम भक्ति संतन कर संगा' अर्थात भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले संतों का संग आवश्यक है, जब व्यक्ति संतों के सान्निध्य में आता है, तभी उसके भीतर भक्ति का बीज अंकुरित होता है और भगवान की प्राप्ति सहज हो जाती है। संतों का संग मन को शुद्ध करता है और जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। कथा के दौरान भजन...