नई दिल्ली, मार्च 30 -- नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता दिल्ली हाईकोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के व्यक्तित्व के अधिकारों के संरक्षण का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य की सहमति के बिना किसी भी कंटेंट का इस्तेमाल नहीं किया जाए।न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने ये आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि आलोचना का अधिकार सभी को है। पीठ ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने कभी मानहानि का मामला नहीं किया। वे वाद-विवाद से ही लोगों को गलत साबित करते थे। पीठ ने कहा कि आप आलोचना, प्रशंसा, इच्छा हर चीज से ऊपर हैं। आपको इन सबसे ऊपर माना जाता है। सुनवाई के दौरान अनिरुद्धाचार्य की तरफ से पेश वकील ने कहा कि उनके नाम व फोटो का प्रयोग सट्टा और गेमिंग चलाने वाले ऐप में किया जा रहा है। एआई की मदद से कुछ ऐसे कंटेंट ऐसे दिखाएं जा रहे हैं। जिसके मुताब...