बिलासपुर, फरवरी 19 -- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2004 के दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिला के प्राइवेट पार्ट में पेनिट्रेशन के बिना ही अगर इजैक्युलेशन हो जाए तो ऐसे अपराध को दुष्कर्म नहीं बल्कि 'दुष्कर्म का प्रयास' माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के बजाय दुष्कर्म के प्रयास का दोषी ठहराया और उसे निचली अदालत द्वारा दी गई सात साल की सजा को कम कर दिया। हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उसकी सजा घटाकर 3 वर्ष 6 माह का कठोर कारावास करने के साथ ही 200 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने एक अपील पर 16 फरवरी को सुनाए अपने आदेश में कहा, "रेप साबित करने के लिए पेनिट्रेशन का सबूत जरूरी है, भले ही थोड़ा-बहुत हो। इस मामले में जो सबूत हैं, वे ...
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