मुजफ्फरपुर, सितम्बर 30 -- मुशहरी, हिसं। बिहार के पुराने और जीर्णशीर्ण लीची बागों को वैज्ञानिक जीर्णोद्धार व छत्रक प्रबंधन से फिर उत्पादक बनाया जा सकेगा। इससे किसानों को नया बाग लगाने की जरूरत नहीं होगी और कम समय में पैदावार बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी में 28 से 30 सितंबर तक 'पुराने लीची बागों का जीर्णोद्धार एवं उत्पादन वृद्धि' विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण हुआ।यह बामेती, पटना द्वारा प्रायोजित था। इसमें मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, सारण व सीवान के 20 सहायक तकनीकी प्रबंधक और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। उन्हें कटाई-छंटाई, पोषक तत्व, सिंचाई व कीट-रोग प्रबंधन की जानकारी दी गई। निदेशक डॉ. बिकाश दास ने कहा कि नया बाग लगाने के बजाय वैज्ञानिक जीर्णोद्धार बेहतर विकल्प है। जीर्णोद्धार के दौरान...