रांची, नवम्बर 23 -- रांची, वरीय संवाददाता। पारसनाथ से खंडगिरी उदयगिरी विहार के क्रम में जैन मुनि सुतीर्थ सागर महाराज का प्रवचन रविवार को प्रातः 8:15 बजे अपर बाजार स्थित जैन मंदिर में हुआ। मुनि श्री ने अपने प्रवचन में जैन मुनिराजों द्वारा धारण की जाने वाली पिच्छी (मयूर पिच्छिका) का जैन धर्म में महत्व विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह पिच्छी उनकी अहिंसा के महाव्रत के पालन तथा संयम की पहचान का प्रतीक है। पिच्छी का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उपयोग जीव रक्षा है। मुनिराज किसी भी स्थान पर बैठने, सोने या चलने से पहले उस जगह को पिच्छी से अत्यंत धीरे से साफ करते हैं, ताकि कोई सूक्ष्म जीव या कीड़ा अनजाने में कुचला न जाए। मुनि श्री ने बताया कि पिच्छी मोर के उन पंखों से बनाई जाती है जिन्हें मोर स्वयं स्वाभाविक रूप से छोड़ देता है, इसलिए इसमें ह...