नई दिल्ली, जुलाई 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि नाबालिग से यौन उत्पीड़न की जानकारी को भरोसेमंद माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि ऐसी जानकारी रखने वाले व्यक्ति को पोक्सो अधिनियम के तहत पुलिस समेत संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी होगी। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट और निचली अदालत के एक आदेश को रद्द कर दिया। दोनों अदालतों ने शिक्षकों और प्रधानाध्यापिका को पोक्सो अधिनियम के तहत अपराधों से मुक्त कर दिया था। मामले पर विचार करते हुए पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट और निचली अदालत यह मानने में गलती कर बैठे कि क्योंकि यौन उत्पीड़न के कोई स्पष्ट दिखाई देने वाले संकेत नहीं थे, इसलिए यह मानने का कोई कारण नहीं था कि ऐसा अपराध हुआ है। यह भी पढ़ें- Faridabad News: ...