शाहजहांपुर, फरवरी 27 -- शाहजहांपुर, संवाददाता। मुमुक्षु आश्रम परिसर में आयोजित श्रीरामकथा के तीसरे दिन कथाव्यास विजय कौशल ने 'नरसी का भात' प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उनके कथन के दौरान श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई श्रोता अश्रुपूरित नेत्रों से कथा सुनते रहे। कथाव्यास ने बताया कि कृष्णभक्त नरसी मेहता अत्यंत निर्धन थे और पुत्री नानीबाई के भात की व्यवस्था करने में असमर्थ थे। ससुराल पक्ष द्वारा भेजी गई लंबी मायरा सूची से उनकी स्थिति और कठिन हो गई। समाज के तानों के बीच नरसी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। कथा में वर्णित किया गया कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सेठ के रूप में प्रकट हुए और मायरा भरकर नरसी की लाज रखी। इसके बाद देवर्षि नारद और भगवान विष्णु का प्रसंग सुनाया गया। नारद की तपस्या, कामदेव का प्रयास, अहंकार और भगवान विष्णु द्वारा लीला के म...
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