नई दिल्ली, अक्टूबर 14 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति केवल अपनी दिव्यांगता का हवाला देकर पत्नी और नाबालिग बच्चे सहित अपने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। हालांकि, कोर्ट ने उसकी अंतरिम भरण-पोषण राशि 8 हजार रुपये से घटाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी सौ फीसदी दिव्यांगता से ग्रस्त एक ऐसे व्यक्ति के मामले में की, जो पूरी तरह सुनने में असमर्थ है। वह बोल भी नहीं सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के समय दिव्यांगता थी। ऐसे में शादी के बाद की जिम्मेदारी का अंदाजा होना चाहिए था। यह भी पढ़ें- 'सड़क हादसे के आरोपी का बरी होना क्लीनचिट नहीं, पीड़ित का मुआवजा रद्द नहीं होगा'पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती जस्टिस संजीव नरूला की बेंच उस व्यक्ति की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उसने फैमि...