नई दिल्ली, मई 13 -- राजस्थान हाईकोर्ट ने सोलर पावर परियोजना के लिए खेजड़ी के पेड़ों को काटने के प्रस्ताव की निंदा की। हाईकोर्ट ने इसे तकनीकी प्रगति के नाम पर पर्यावरण के विनाश का एक 'स्पष्ट उदाहरण' बताया। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि पेड़ों की सुरक्षा के लिए राज्य द्वारा गठित समिति एक भी पेड़ कटने से बचाने के लिए हर संभव विकल्प तलाशेगी। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की पीठ ने ये टिप्पणियां एक एनजीओ, 'श्री जंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था' द्वारा दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कीं। याचिका में राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की सुरक्षा की मांग की गई थी। पीठ ने निर्देश दिया कि कानून के अनुसार, बिना पूर्व अनुमति के कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे की जांच करने और सुरक्षात्मक उपायों (संभावित कान...