प्रयागराज, मार्च 27 -- प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। 'ज्ञान को शक्तिकामी नहीं, मुक्तिकामी होना चाहिए'। यह विचार राजनीतिविज्ञानी प्रो. मणीन्द्रनाथ ठाकुर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रो. सत्यप्रकाश मिश्र स्मृति व्याख्यानमाला के 19वें व्याख्यान में व्यक्त किया। 'ज्ञान का जनतंत्र' विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज ज्ञान पर बाजार का कब्जा बढ़ता जा रहा है, जिससे उसके जनतांत्रिक स्वरूप पर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में हर स्तर पर ज्ञान का लोकतंत्रीकरण जरूरी है, ताकि इंसान को उसकी संपूर्णता में समझा जा सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न ज्ञान परंपराओं के बीच संवाद का अभाव फांसीवादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है। इसलिए बहुआयामी संवाद और विविध ज्ञान परंपराओं का समन्वय समय की मांग है। औपनिवेशिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान की सीम...