प्रयागराज, अप्रैल 12 -- प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तिलक भवन में शनिवार को पहल व्याख्यानमाला हुई। साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख कथाकार, संपादक और 'पहल' के संस्थापक ज्ञानरंजन को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके बहुआयामी योगदान पर विस्तार से चर्चा की। संस्कृतिकर्मी सुधीर सिंह ने ज्ञानरंजन को चेतना का परिष्कार करने वाला लेखक बताया। मुंबई से आए वरिष्ठ लेखक जितेंद्र भाटिया ने कहा कि बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में पहल एक प्रतिनिधि बौद्धिक पत्रिका के रूप में स्थापित हुई। उन्होंने बताया कि अपने शुरुआती दो दशकों में इसकी तुलना पेरिस रिव्यू और ग्रांटा जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं से होने लगी थी। ज्ञानरंजन ने इसे वैश्विक सरोकारों, वैज्ञानिक चिंतन और पर्यावरण जैसे विषयों से जोड़ा।कथाकार प्रो. कुमार बीरेंद्र ने कहा कि पहल का प्रचा...