रांची, सितम्बर 30 -- आशीष तिग्गा रांची। फिल्म ऐसी कड़ी है जो विशेष व्यक्तित्व से जुड़े लोगों के आदर्श और विचारों को जीवंत रखती है। ऐसी ही पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की जीवनी पर मरणोपरांत बनी 'नाची से बांची' फिल्म ने उनकी विचारधारा को राष्ट्रीय पटल पर जीवंत रखा है। आज भी लोग उस आदर्श को अपने संबोधन में स्मरण करते रहते हैं।

फिल्म का निर्माण वर्ष 2016 में मेघनाथ और बिजू टोप्पो के मार्गदर्शन में अखड़ा के सहयोग से डॉ मुंडा के आदर्श 'जे नाची से बांची' पर डॉक्यूमेंट्री बनाई गई, जिसे एक साल बाद वर्ष 2017 में राष्ट्रपति के द्वारा बेस्ट बायोपिक फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। इस फिल्म में डॉ मुंडा के जीवनकाल से जुड़ी विजुअल चलचित्रों को उपयोग करते हुए उनके जीवन के महत्वपूर्ण पलों और कार्यों-आदर्शों को अमल करते हुए दिखाया गया।

फिल्म की विशेषत...