नई दिल्ली, जुलाई 21 -- नई दिल्ली, प्रसं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में मंगलवार को लेखिका और जेल सुधारक प्रो. वर्तिका नंदा की पुस्तक ज से जेल का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि जेल सुधार की दिशा में काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता खो सकता है, लेकिन उसका सम्मान नहीं छीना जा सकता। बंदियों को समाज में सम्मान के साथ दोबारा जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने पुस्तक को श्रेष्ठ रचना बताया, जबकि सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इसे जेल जीवन का जीवंत दस्तावेज कहा। वर्तिका नंदा ने कहा कि यह पुस्तक उनके जेलों में मिले वास्तविक अनुभवों पर आधारित है।

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