'जब महीनों से बातचीत ही नहीं तो आत्महत्या के लिए उकसाया कैसे'
लखनऊ, अगस्त 7 -- लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दोषी ठहराए गए पति को बरी कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के ही निष्कर्ष के अनुसार आत्महत्या से लगभग साढ़े पांच महीने पहले से पति का पत्नी से कोई संपर्क या बातचीत ही नहीं था, ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उसने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने अंकुर टंडन की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए, ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे दी गई सजा को निरस्त कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने अपीलार्थी को धारा 498-ए, 306 आईपीसी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराया था, जबकि दहेज हत्या की धारा 304-बी से बरी कर दिया था। मामले के अनुसार मृतका की शादी 14 दिसंबर 2004 को...
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