नई दिल्ली, मार्च 10 -- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार को उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम प्रणाली की अपारदर्शिता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में नियुक्तियों का मुख्य आधार संख्यात्मक या लैंगिक प्रतिनिधित्व के बजाय पूरी तरह से योग्यता (मेरिट) होना चाहिए। वे महिला दिवस के अवसर पर इंडियन वुमेन इन लॉ (IWiL) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे। यह चर्चा उच्च न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े एक सत्र का हिस्सा थी।कॉलेजियम की कार्यप्रणाली पर सवाल बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दत्ता ने कहा कि कॉलेजियम के कामकाज में पारदर्शिता की इतनी कमी है कि अक्सर खुद जजों को भी यह स्पष्ट नहीं होता कि कॉलेजियम कैसे ...