नई दिल्ली, जनवरी 26 -- चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय एक जीवंत संस्था है, जिसे निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। कानून को न तो परिवर्तन का विरोध करना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे नवीनता को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कानून परिवर्तन के अनुरूप नहीं ढलता है, वह शुद्ध नहीं रह जाता। वहीं जो कानून बिना सोचे-समझे हर नवीनता को अपना लेता है, उसके अपना नैतिक केंद्र खोने का जोखिम रहता है। पणजी में 2 दिवसीय एससीएओआरए अंतरराष्ट्रीय विधि सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'प्रत्येक कानूनी प्रणाली सदियों के संघर्ष, वाद-विवाद, समझौते और नैतिक साहस से प्राप्त विरासत है।' यह भी पढ़ें- LIVE: गणतंत्र दिवस के पहले भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट, दिल्ली में सिक्योरिटी टाइट सीजेआई ने जोर देकर कहा कि सवाल ...
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