वाराणसी, अप्रैल 29 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू के हिंदी विभाग और केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा की तरफ से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मंगलवार को 'नवगीत का समकाल' विषय पर चर्चा हुई। हिंदी विभाग के रामचंद्र शुक्ल सभागार में वक्ताओं ने कहा कि कविता वही जीवित रहेगी, जो लोक कंठ में बसेगी। समापन सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. राजेंद्र गौतम ने कहा कि अस्सी के दशक में नवगीत के संग्रहों का अधिकतम प्रकाशन हुआ। इस संगोष्ठी के माध्यम से नवगीत की नई दिशा का सूत्रपात हुआ है। मुख्य अतिथि प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने कहा कि इस संगोष्ठी के बाद नए नवगीतकार जरूर अंकुरित होंगे। यह भी पढ़ें- जीवन के सारे भावों को प्रदर्शित करते हैं गीत : कुलपति प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ने समापन वक्तव्य में कहा कि अधिकांश नवगीतकार नई कविता की अंतर्वस्तु और शिल्...