'कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घिर आयो रे ननदी...'
भभुआ, अगस्त 4 -- कजरारे बादलों ने आसमानों पर अपना डेरा जमा लिया है और रिमझिम फुहारों एवं पंक्षियों के कलरव मस्ती का माहौल छाने लगा है धरती भी चुनर धानी को छोड़कर अब हरे लिबास में लिपटी दिखने लगी है बागीचों में झूला झुलती युवतियां व धान रोपती महिलाएं गा रही हैं कजरी भभुआ, कार्यालय संवाददाता। सावन में कजरारे बादलों ने आसमानों पर अपना डेरा जमा लिया है। रिमझिम फुहारों और पंक्षियों के कलरव मस्ती का माहौल छाने लगा है। धरती चुनर धानी छोड़ हरे लिबास में लिपटने लगी है। गांव की माटी की सोंधी महक बारिश की बूंदों को पाकर हवा में ऐसी घुल रही है कि मन मल्हार होने लगा है। यह भी पढ़ें- सावन में फीकी पड़ रही कजरी की तान, सिवानों और बागों से सिमट रहा लोकरंगमहिलाओं का आनंद ऐसे ही दिलकश और माधुर्य से परिपूर्ण माहौल में यहां के बाग-बागीचों व खेत-बधार से झूला झु...
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