'ओम शांति' के जाप से आत्मज्ञान का संदेश, पांच विकारों से मुक्ति की बताई राह
उन्नाव, सितम्बर 27 -- बांगरमऊ। नगर के ब्लाक रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय गोष्ठी में बैंगलुरू से आए बीके मंजूनाथ ने आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मचिंतन पर विचार रखे। उन्होंने 'ओम शांति' के महत्व की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को स्वयं को शरीर न मानकर अजर-अमर और अविनाशी आत्मा के रूप में समझना चाहिए। बीके मंजूनाथ ने कहा कि 'ओम शांति' का भाव है कि मैं शरीर नहीं, बल्कि अजर-अमर-अविनाशी आत्मा हूं। मेरे पिता परम कल्याणकारी, सर्वशक्तिमान, सुखदाता और पतित से पावन बनाने वाले परमपिता परमात्मा शिव हैं। उन्होंने बताया कि अमृत बेला के समय सर्वप्रथम तीन बार 'ओम शांति' का उच्चारण करना चाहिए।उन्होंने आत्मा को परमात्म ज्ञान का एटीएम बताते हुए कहा कि सभी भाई-बहनों को अपने अंदर ज्ञान रूपी धन...
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