नई दिल्ली, जून 26 -- बनारस के खूबसूरत घाट, सुबह की पहली किरण और गंगा आरती... इसी माहौल में रहते हैं पंडित चतुर्वेदी। वे शास्त्रों और नियमों को मानने वाले एक कट्टर ब्राह्मण हैं। एक दिन उनकी पत्नी एक अनाथ बच्चे को घर ले आती है। शुरुआत में पंडित जी उस बच्चे की तरफ देखते तक नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे उस छोटे बच्चे की मासूमियत और प्यारी बातों के आगे हार जाते हैं। दोनों में सगे बाप-बेटे से भी गहरा प्यार हो जाता है।फिर आता है कहानी में ट्विस्ट कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब कुछ सालों बाद शहर में दंगे भड़कते हैं और उस बच्चे की असली मां सामने आती है। पंडित जी को पता चलता है कि जिस बच्चे को उन्होंने जान से भी ज्यादा चाहा, वह असल में एक मुस्लिम है। ये सच पंडित जी को अंदर तक हिला देता है। उन्हें लगता है कि उनका धर्म भ्रष्ट हो गया। वे भारी मन से बच्चे...