नई दिल्ली, जुलाई 1 -- सु्प्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि आरोपी को आरोपपत्र की प्रति नहीं दिए जाने को स्वत: जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने आरोपी की स्वत: जमानत याचिका खारिज करने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यह बात कही। आरोपी ने यह कहते हुए जमानत देने का अनुरोध किया था कि उसे आरोपपत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 193(8) के तहत आरोपपत्र की अतिरिक्त प्रतियां दाखिल नहीं किए जाने से स्वयं आरोपपत्र अमान्य नहीं हो जाता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जैसे पहले दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत व्यवस्था थी, उसी तरह बीएनएसएस के तहत भी स्वत: जमानत का अधिकार तभी बनता होता है, जब लागू प्रावधानो...