नई दिल्ली, अप्रैल 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक बार जब सैन्य बल अपने किसी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के बजाय आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने का विकल्प चुनते हैं, तो उस मामले में बरी होने पर उसके (अधिकारी) के खिलाफ अनुशासनात्मक नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वायु सेना के एक पूर्व अधिकारी की अपील स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए अपीलकर्ता व वायु सेना के पूर्व स्क्वाड्रन लीडर आर. सूद का सम्मान बहाल कर दिया। उन्हें लगभग तीन दशकों के बाद सेवा से जुड़े लाभ भी दिए गए। यह भी पढ़ें- आपराधिक मामले में बरी तो नहीं कर सकते हैं अनुशासनात्मक कार्रवाई- सुप्रीम कोर्ट आपराधिक कार्यवाही में बरी किए जाने के ...