नई दिल्ली, जुलाई 21 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया कि आतंकवादी हिंसा और यहां तक कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर देने वाले अपराधों के मामलों में भी संवैधानिक सुरक्षा और आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने राजस्थान में तीन दशक पहले हुए बम ब्लास्ट मामले में दोषी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा रद्द करते हुए टिप्पणी की। जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की पीठ ने अपने फैसले में माना कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ बम धमाकों से डर, दुख और जनता में आक्रोश पैदा होता है। हालांकि, पीठ ने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में संवैधानिक मानकों को कम करने के बजाय संवैधानिक सिद्धांतों का और भी सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 183 पन्नों के अप...