नई दिल्ली, जुलाई 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और उसके आसपास गैर-कानूनी रेत खनन गतिविधियों में मदद करने वालों के खिलाफ एहतियाती हिरासत आदेश जारी किए जाने चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहे हैं और वे किसी भी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं। यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ 'राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों को खतरा' शीर्षक वाले एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना में 551 लोगों की पहचान की गई है जो अवैध रेत खनन में मदद करते हैं। पीठ ने कहा कि आप उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लेते? ये वे लोग हैं जिनके खिलाफ एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए जाने चाहिए। पीठ ने कहा कि इनमें से कुछ लोगो...