नई दिल्ली, मार्च 18 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अपीलीय अदालतों को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा दिए गए फैसलों और मुआवजे में बदलाव करने से पहले सबूतों की सावधानी से दोबारा जांच करनी चाहिए और स्पष्ट कारण बताने चाहिए। ये मामले मोटर वाहन अधिनियम जैसे कल्याणकारी कानूनों के तहत आते हैं। ये टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने एक फैसले में कीं, जिसके तहत उसने सड़क दुर्घटना के एक मामले में एक पूर्व प्रबंधक को दिए गए मुआवजे को 35.61 लाख रुपये से बढ़ाकर 97.73 लाख रुपये कर दिया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मामले को खत्म करने से पहले, हम यह दोहराना उचित समझते हैं कि जब कोई अपीलीय अदालत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा विधिवत दर्ज किए गए तथ्यों के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करती है। वि...
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