हापुड़, मार्च 3 -- होली आते ही परदेस गए बेटों-बेटियों की घर वापसी शुरू हो जाती है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर रौनक बढ़ जाती है। गांव-कस्बों में चौपालें सजने लगती हैं। बावजूद इसके गांव लठीरा में संचालित गुरु विश्राम वृद्धाश्रम में 120 से अधिक बुजुर्गों की आंखें अब भी उसी राह को तकती हैं कि शायद कोई अपना लौट आए। यहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उम्मीद और इंतजार का दिन बन जाता है। कोई बेटा दिल्ली में नौकरी करता है, तो किसी की बेटी दूसरे राज्य में बस चुकी है। कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं जिनसे वर्षों से कोई मिलने नहीं आया। वृद्धाश्रम के एक बुजुर्ग ने बताया कि होली पर लगता है कि शायद इस बार कोई लेने आ जाएगा.। उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान है, लेकिन आंखों में इंतजार साफ झलकता है। संस्था के डॉ. जीपी भगत का कहना ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.