विशाल आनंद, मार्च 3 -- होली पर शाहजहांपुर में निकलने वाला लाट साहब का जुलूस एक अनोखा आयोजन है, जिसमें लाट साहब पर रंग के साथ-साथ जूते-चप्पल भी बरसते हैं। 300 वर्ष पुराने जुलूस की यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और उल्लास के साथ चल रही है। भारी भीड़ के चलते जुलूस में हुल्हड़बाजी और मार-कुटाई की संभावना बनी रहती है। इससे निपटने को पुलिस को हर बार नई रणनीति बनानी पड़ती है। दिलचस्प बात यह है कि शाहजहांपुर का लाट साहब जुलूस प्रशासनिक सेवा की ट्रेनिंग के दौरान केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाता है। अवध क्षेत्र के प्रभाववश यहां के स्थानीय नवाब खुल कर लोगों के साथ होली खेलते थे। शाहजहांपुर के स्थानीय इतिहास पर लिखी गई किताबें बताती हैं कि नवाब होली के दिन न केवल महलों से बाहर आकर रंग खेलते थे, बल्कि जुलूस के रूप में नगर भ्रमण भी करते थे। समकालीन उर्दू स्...